मेरे पापा के द्वारा लिखी गई

 जब में इस जग में आया,माँ हरषाई …….

 बुआ ने गीत गया,बहनों ने थाली बजाई …..

सभी समझे आज मै सुखी,पर मेने ख़ुशी नहीं पाई .

 कितना अभागा,बदनसीब,बात बड़ी दुखदाई ………….

तेरे खजाने में सब कुछ था,क्या कमी आई ………….

बाप की पदवी तो दो बार पाई…..

 पर इस घर में तुने बेटी नहीं भिजवाई …………

 इतनी मेहर तो मालिक अब कर देना ………………..

तेरे खजाने में कोई कमी नहीं खलेगी ………….

जब मेरे आँगन में पोती चहकेगी ………………..

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1 टिप्पणी (+add yours?)

  1. nand kishor sarswat
    मई 09, 2010 @ 17:02:46

    your father is great,,,,,,,,,,,,,,,,

    प्रतिक्रिया

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