माँ

आसमा थोडा और ऊँचा हो जाये ,

ताकि मेरी उचाइयो को थोड़ी जगह मिले|

कूद कूद कर गिर जाता हु धरती पर ,

ऊँची कूद की थोड़ी और गुंजाईश मिले|

जब जब भी टकरा कर तुमसे ,

जहा भी गिरा फूल ही खिले|

मैंने पाया सिर्फ मेहनत ही मेरी थी ,

उचाइयो के होंसले तो तुम से मिले|

जब जब पुरजोर कोशिश की ,

मैंने जमीन के सुब मजबूत स्तम्भ हिले|

देखते देखते हो गए कितने छोटे,

जमाने के राज-ए-सुल्तान गर्वीले|

खुदा रहता है माँ के रूप में जहाँ में ,

बस उनके चरणों में मेरी इबादत मिले |

आसमा थोडा और ऊँचा हो जाये ,

ताकि मेरी उचाइयो को थोड़ी जगह मिले|

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