हम नंगे पांव चलने वाले लोग|

अपने अपने दायरे के होंगे लोग गुलाम ,
दायरे तोड़ निकलते है हम  नंगे पांव चलने वाले लोग|
जितनी बड़ी सरहदे उतने बड़े बंधन ,
बेड़िया तोड़ निकलते है, हम नंगे पांव चलने वाले लोग|
दुरिया होती होगी तुम्हारे नक़्शे में ,
फासले माप लेते है मंजिल तक,हम नंगे पांव चलने वाले लोग|
चाँद सितारों को निगाह में रखने वालो,
पत्थर की ठोकर बन जाते है,हम नंगे पांव चलने वाले लोग|
रोशनियों  के कारवा चुक जाते है,तिल तिल
अँधेरे को चीर कर निकल जाते है ,हम नंगे पांव चलने वाले लोग|
सर्दी गर्मी बारिश तूफान के खौफ-अ-मंज़र,
नंगे बदन सब सह लेते है हम नंगे पांव चलने वाले लोग|
तेरे लाल कालीन पर कभी सजदा नहीं करेंगे,
हर चीज को रौंद डालते है,हम नंगे पांव चलने वाले लोग|
Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: