भारतीय नीतिया

आज हम स्वंत्रता के ६३ वर्षो बाद भी जब हम आत्मावलोकन करते है तब आश्चर्य होता है की अकूत और
असीमित प्राकृतिक सम्पदा ,अद्वितीय बौधिक प्रतिभा व अतुलनीय वित्तीय  समृद्धि के होते हुवे भी आज
भारत महाशक्ति बनाना तो दूर अपनी अन्तर्निहित शक्तियों को भी विस्मृत कर रहा है|

आज सारी सारी की सारी नीतिया विदेशी तर्ज पर बन रही है | महज १५-२०% मत प्राप्त व्यक्ति संसद में जाकरनीति नियंता बन जाता है| अपना वेतन बढ़ाना हो तो विधेयक ध्वनि मत से पाप्त हो जाता है व कसाब वअफजल गुरु को फांसी देनी हो तो मामला संसद  में ६ साल तक अटक जाता है |  भ्रस्टाचार से जनता त्रस्त है |
कृषि प्रधान देश में भी किसान आत्महत्या कर रहा है|प्रशासन   सत्ता के मद में चूर है| और ये कैसी गरीबी है साथियों जो अरबो खरबों रुपये फूंक देने के बाद भीख़तम होने का नाम नहीं ले रही है| हमारे ही ATS   अफसर कह रहे है की हर तीसरा भारतीय भ्रष्ट   है|40 % से ज्यादा लोग गरीबी रेखा  से नीचे रह रहे है|  गोदामों में अनाज सड रहा है लेकिन भुखमरी बढ़ रही है|462 आतंक वादी कैद है हमारी जेलों में ,लेकिन हमारे प्रधानमंत्री को फुर्सत नहीं है उनपर कार्यवाही करने की..आज आतंक वादियों मो मुठभेड़ में गोली नहीं मारी  जाती बल्कि उन्हें मुर्गा और बिरयानी खिलाई जाती है |

अच्छा होता खुद आंतकी संसद के अन्दर जाते ,,
और हमारे कुछ निति नियंता भी अन्दर मर जाते

यह भारतीय नीतियों का परिणाम ही है की एक समस्या समाप्त हुई नहीं की दूसरी खड़ी होजाती है| हम समस्याओ की सेचुरी  बना कर अव्यवस्था प्रतियोगिता के सचिन तेंदुलकर बन चुके है |

हमारे देश के चित्रकार ही देवी देवताओ के अश्लील  चित्र बनाकर विदेशो में  बस जाते है और हमारी सरकार
उनका बाल भी बांका नहीं कर पाती है ,सर्व श्रेष्ट चित्रकार का पुरस्कार देती है तो मन में पीड़ा होती है | हम
हमारा कोहिनूर हीरा और भवानी तलवार वापस नहीं ला सके | अभी तक हम पृथ्वीराज चौहान की समाधीनहीं ढूंढ़  सके और ताज महल की पूजा करते है | सुभाष चन्द्र बोस को नहीं ढूंढ़ सके | नेहरू,  गाँधी  और वाजपयी   को नोबल नहीं दिला पाए | हम हमारा कश्मीर नहीं ले सके बल्कि कश्मीर पाकिस्तान के हाथो से चीन के पास  में जाते हुवे देख रहे है |विदेशी नागरिक हमारे देश में बिना इजाजत के दशको से रह रहे है और हमारे पूर्व रक्षामंत्री को अमेरिका में कपडे उतारकर तलाशी  देनी पड़ती है| यह है हमारी भारतीय नीतियों के परिणाम और आप मानते है इन परिणामो से मान सम्मान बढ़ता है तो ये आपकी द्रष्टि का दोष है|

इकबाल की पंक्तिया जेहन में आती है.
वतन की फ़िक्र कर नादाँ ,,,मुसीबत आने वाली है…
तेरी बरबादियो के तशकरे है आसमानों में…
और न संभालोगे तो मिट जायोगे अ हिन्दोस्तान वालो,,,,
तुम्हारी दास्ता तक भी न होगी दस्तानो में

आजादी के बाद गिनती के पदक मिले है हमें ओलम्पिक में | हमें हमारे ही पवित्र हिमालय की छोटी माउन्ट अवेरेस्ट पर जाने के लिए विदेशी अनुमति लेनी पड़ती है| मान सरोवर व कैलाश पर्वत पर जाने
के लिए चीन  से वीजा लेना पड़ता है | आज हमारे देश में ऐसा कोई सूत्र नहीं बचा है जो पुरे देश को
एक कर सके| देश भक्ति तो हमें सिर्फ और सिर्फ भारत पाकिस्तान के क्रिकेट  मेच  में देखने को मिलती है| कोई तिरंगे को राष्ट्रिय ध्वज  नहीं मानता तो कोई हिंदी को राष्ट्र भाषा | कोई गाय  को माता नहीं मानता
कोई पवित्र  स्थलों  को पाक नहीं रहने देता| कही पूजा स्थल  आआस्था  का पर्याय है तो कही अपराधो का डेरा|आज हमारे ही देश के मंत्री कहते है की जिसको वन्दे मातरम गाना है वो गाये,,जिनको नहीं गाना है वो नहीं गाये |यह है भारतीय नीतियों के प्राप्त  फल और अगर आप को ये फल मीठे और सम्मान जनक लगते है तोये बेहद चिंता का विषय है|

शांत अहिंसा वाली भाषा जनता समझ नहीं पाती ,
क्या सुभाष चन्द्र वाली भाषा तुमको समझ नहीं आती

आज रूपया डॉलर तो क्या यूरो के मुकाबले भी कमजोर पड़ रहा है|  हमारा ही मॉल निर्यात होकर विदेशी
ठप्पा लग कर इमोरतेंट बन रहा है और उस माल को हम कई सो गुना में खरीद  रहे है| आज विदेश मंत्री
के बिना हम एक साल गुजर देते है |आज तक कोई भी भारतीय राष्ट्रपति पाकिस्तान नहीं जा सका ..
.पता नहीं क्यू उन्हें डर लगता है | जिन देशो की हमने पूर्व में सहायता की है और वे हमारे अहसानमंद
है उन पर भी भारत विश्वास नहीं कर सकता और वे भारत को शत्रु मानते है| हमारे देश में कोई आंतरिक
कलह होती है तो हमें बाहर से धमकिय मिलती है |हमारे देश के सबसे बड़े कांड भोपाल गैस कांड के
आरोपियों को हम खुद ससम्मान उनके देश में भेजकर पीडितो  को २४ साल बाद भी नारकीय जीवन
जीने को मजबूर कर रहे है|

सबसे बड़ी विडंबना की बात ये है की आज हम हिंदी दिवस मन रहे है| जबकि विश्व में और कही नही
अंग्रेजी या जापानी दिवस  नहि मनाया जाता है| ये है हमारी प्रशाशाको ,राजनीतिज्ञों व कुतानीतिग्यो
की नीतिया, जिन्होंने इनका  निर्माण देश को सोने की चिड़िया बनाने के लिए किया था ,दूध की नदियों
वाला देश बनाने के लिए किया था ,देश को विश्व गुरु बनाने के लिए किया था .पर विश्व मंच पर जो
अँधेरे में खड़ा है,बेहद शर्मिंदा में दिख रहा है….ओए सर झुकाए खड़ा है वह है हमारा भारत

तुमको फर्क नहीं पड़ता है उनके मरने जीने में ,,,जो संगीने झेल रहे थे अपने नंगे सीने में….
तुम तो छेप कर बैठ गाये तजे संसद के तह खाने में.. हमने अपने शेर खोये थे चाँद सियार बचाने में

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